देश के कई राज्यों व झारखंड के विभिन्न जिलों से लाखों छठ व्रती आते हैं सतबहिनी



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ के चारों तरफ से खुला खुला दूर तक फैला हुआ मैदान, मन को मोहता मनोरम झरने का संगीत, कल कल करती बहती नदिया, हरियाली से घिरी हुई झरना घाटी, ऊंचे नीचे टीलोंवाली हरी भरी वादियां, नौ मंदिरों की श्रृंखला, रहस्यमयी सातमंजिली साधना सह समाधि गुफा, भव्य सूर्यमंदिर से लगा हुआ बड़ा छठ घाट सुदूर प्रदेशों व झारखंड के विभिन्न जिलों के लाखों छठव्रतियों को आकर्षित करता है। इसी कारण यहां काफी संख्या में निराहार छठव्रती सामूहिक महा अनुष्ठान करने के लिए जुटते हैं। पिछले वर्ष के महाव्रत छठ में व्रतियों के साथ उनके परिजन एवं दर्शकों को मिलाकर 4 लाख की संख्या में लोग सतबहिनी झरना तीर्थ आए थे। इस वर्ष इस संख्या में काफी वृद्धि होने की संभावना है। झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की निबंधित इकाई मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के द्वारा दूर-दूर से आने वाले छठ व्रतियों के लिए छठ घाट पर टेंट, लाइट, शुद्ध पेयजल आदि की व्यवस्था की जाती है। वर्तमान में यहां तीन छठ घाट तैयार हैं। जबकि झरना घाटी, यज्ञशाला मैदान एवं मेला मैदान में भी काफी संख्या में छठव्रती महा अनुष्ठान करते हैं। जहां काफी संख्या में छठ व्रती थाला बनाकर महा अनुष्ठान का आयोजन एवं बड़ा उपवास को रात्रि जागरण करते हैं। यह दृश्य बड़ा ही मनमोहक होता है। जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु सतबहिनी झरना तीर्थ आया करते हैं। इस वर्ष कार्तिक शुक्ल चतुर्थी 13 नवंबर 2026 को नहाए खाए के साथ चार दिवसीय छठ की कठिन तपस्या प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन पूरी शुद्धता के साथ कद्दू की सब्जी अरवा चावल का भात एवं चने की दाल के साथ नहाए खाए किया जाएगा। जबकि दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी 14 नवंबर 2026 को संझत होगा। इस दिन छठव्रती पूरे दिन उपवास करेंगे। संध्या बेला सड़कों एवं पगडंडियों से गीत गाते पैदल एवं गाड़ियों से सतबहिनी झरना तीर्थ पहुंचेंगे। यहां पर पवित्र जलधारा में जल जगा कर दातुन करने के बाद मनोरम झरना में स्नान करके भगवान भास्कर को संझत की संध्या का अर्घ्य प्रदान करेंगे। जबकि कलशों में जल लेकर अपने-अपने स्थान पर समूह में बैठकर सूर्य भगवान को समर्पित पांच-पांच गीत व भजन गाएंगे। उसके बाद अपने-अपने घर की ओर गीत गाते हुए प्रस्थान करेंगे। वहां जाकर नया अरवा चावल, दूध एवं गुड़ की खीर बनाकर बिना चकला बेलन के हाथ से बनी हुई पुड़ी के साथ खाकर खरना करेंगे। चंद्रास्त के पहले भगवान भास्कर की परावर्तित किरणों से प्रकाशित चंद्रमा को अर्घ्य देखकर विश्राम करेंगे। इसी के साथ 36 घंटे का कठिन निर्जला एवं निराहार व्रत प्रारंभ हो जाएगा। वहीं सभी घरों में गेहूं सूखाने, गेहूं पीसने, प्रसाद बनाने आदि के दौरान गाए जा रहे छठ के गीतों से क्षेत्र का पूरा वातावरण भक्ति मय हो जाएगा। चार दिवसीय इस महाव्रत में सफाई एवं शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी 15 नवंबर 2026 को बड़ा उपवास के दिन ढाई तीन बजे से ही काफी संख्या में सभी रास्तों एवं पगडंडियों से भारी संख्या में भीड़ सतबहिनी झरना तीर्थ की ओर पहुंचती दिखाई देगी। रंग-बिरंगे वस्त्रों से सज्जित व्रतियों के द्वारा गाए जा रहे छठ गीतों की गूंज दूर-दूर से सुनाई देती है। इस दौरान हजारों छोटी बड़ी गाड़ियों से निराहार छठ व्रती एवं उनके परिजन दूर-दूर से सतबहिनी झरना तीर्थ पहुंचते हैं। व्रतियों के थाला के आलावे सभी मैदान एवं खेत गाड़ियों से खचाखच भर जाता है। इस दिन पवित्र जलधारा के निकट पहुंचकर अक्षत जौ आदि से जल जगाते हुए दातुन करने के बाद पवित्र झरना में स्नान करके अस्ताचल गामी सूर्य को ‘एहि सूर्य सहस्रांशो तेजो राशि जगत्पते, अनुकंप्यं मां भक्तया गृहाणार्घ्य दिवाकर:’ मंत्र से अर्घ्य प्रदान करेंगे। इस दौरान सतबहिनी झरना तीर्थ के स्थायी पुजारी पंडित आदित्य पाठक एवं पंडित प्रवीण पांडेय के साथ-साथ काफी संख्या में उपस्थित पुरोहितों के द्वारा दूध एवं जल से व्रतियों को अर्घ्य दिलाया जाएगा। अर्घ्य प्रदान करने के बाद सभी छठव्रती पूर्व से निर्धारित अपने-अपने थाला पर जाकर अस्तरण माई की स्थापना कर प्रसाद व पूजन सामग्री से भरे हुए सूप दउरा एवं ईख स्थापित करेंगे। रात्रि की प्रथम बेला में दोना में जलता हुआ दीपक सजाकर जल में दीपदान करेंगे। जल में जलते हुए दीपों का प्रतिविंब एक अलौकिक दृश्य का सृजन करता है। जबकि पूरी रात झरना घाटी, छठ घाट, नवीन यज्ञशाला मैदान, मेला मैदान, बड़ा तालाब के पिंड पर, यज्ञशाला में, सूर्य मंदिर में, दो मंजिली विशाल मंदिर के बरामदा व छत पर से छठ के गूंजते हुए गीतों से इलाके का वातावरण भक्ति मय हो जाएगा। 20 – 25 दिन पहले से ही समिति के लोग सुविस्तृत क्षेत्र की सफाई, घाटों पर नंबरिंग आदि के कार्य में लगे हुए हैं। जबकि टेंट व लाईटिंगआदि के लिए जनता टेंट हाउस दरिहट रोहतास बिहार की बुकिंग की गई है। ताकि व्यवस्था में कोई कमी नहीं रहे। मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के अध्यक्ष सह विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेश प्रसाद सिंह समय-समय पर तैयारी की खुद पहुंच कर समीक्षा कर रहे हैं। वहीं समिति के सचिव ज्योतिर्विद पंडित मुरलीधर मिश्र एवं अन्य सदस्यों के द्वारा लोक आस्था के महापर्व छठ के सामूहिक महा अनुष्ठान की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है।