क्लास, कार्यालय, प्रशिक्षण व प्रखंड से जिला तक की बैठकों में भाग लेना उन्हीं के जिम्मेबच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के सरकारी दावे पर सवालिया निशानउदाहरण है एक प्रखंड, पूरे जिले की यही हालत, चल रहे सैकड़ों एकल शिक्षकीय विद्यालयसदास्मृत आशुतोष रंजनप्रियरंजन सिन्हाबिंदास न्यूज, गढ़वागढ़वा : शिक्षा विभाग द्वारा चालू सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए साल की अधिकांश अवधि शिक्षक प्रशिक्षण में बीत जाती है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत 26 वर्षों में छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए कई आधुनिक तकनीक की जानकारी दी गई है। प्रशिक्षण के दौरान ही शिक्षा विभाग की सबसे अधिक निधि का खर्च होता है। लेकिन सर जमीन की स्थिति ठीक इसके विपरीत है। बानगी के रूप में एक प्रखंड की हालत पर गौर करें तो कांडी प्रखंड क्षेत्र में 22 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां 26 सालों से केवल एक ही शिक्षक पदस्थापित हैं।इन स्कूलों में शिक्षा के आधुनिक तकनीक का कैसे हो प्रयोग :- एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षा के आधुनिक तकनीक का कितना बेहतर प्रयोग हो पाएगा यह समझने की चीज है। क्योंकि इकलौते शिक्षक को पीर बावर्ची भिश्ती खर – सबकी भूमिका निभानी पड़ती है। वही शिक्षक विद्यालय के प्रधानाध्यापक या शिक्षक दोनों की भूमिका में रहते हैं। उन्हें ही 1 से 5 कक्षा तक के बच्चों को सभी विषय पढ़ाना है। कार्यालय का भी कार्य निबटाना है। सरकारी बैठकों में भी हिस्सा लेना है। आप बताइए एक शिक्षक के कितने भाग किए जा सकते हैं कि वह क्लास में भी, कार्यालय में भी और प्रखंड एवं जिला स्तरीय मीटिंग में भी एक साथ उपस्थित रहें।शिक्षा पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव :- ऐसे में बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिसका सर जमीन पर कोई उपाय नहीं है। हालांकि सरकार ने बहुत बार एक शिक्षकीय विद्यालय में छात्र संख्या के अनुसार और अधिक शिक्षकों के पदस्थापन का संकल्प व्यक्त किया है। लेकिन आजतक वही ढाक के तीन पात हैं।कौन कौन से हैं ऐसे विद्यालय :-प्रखंड क्षेत्र के एक शिक्षकीय विद्यालयों में प्रावि भंडरिया, उत्क्रमित प्रावि डीहवार टोला, नव प्रावि डेमा, नव प्रावि भरत पहाड़ी, नव प्रावि बरवाडीह, नव प्रावि चौखड़ी, उत्क्रमित प्रावि भुड़वा, नव प्रावि ढबरिया, प्रावि बहेरवा, उत्क्रमित प्रावि मरहटिया, नव प्रावि गरदाहा, उत्क्रमित प्रावि नवडीहवा टोला, प्रावि पीपरडीह, प्रावि बड़की चटनियां, नव प्रावि लुका, प्रावि चंद्रपुरा, नव प्रावि जतरो, नव प्रावि जमुआ, नव प्रावि आजाद नगर, नव प्रावि पखनाहा, नव प्रावि बहेरवा खाड़ी व उत्क्रमित प्रावि हरिगांवा के नाम शामिल हैं। इनमें 2000 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। इन सभी विद्यालयों की स्थापना 2001 से 2003 तक हुई है। तभी से जो एक शिक्षक स्कूल चला रहे हैं सो आज तक अकेले ही बने हुए हैं। इस अवधि में शिक्षक ने सैकड़ों बार एक और शिक्षक के पदस्थापन की मांग की है। लेकिन बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए कृत संकल्पित शिक्षा विभाग और सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा।इनमें पढ़ते हैं केवल मजदूर व किसानों के बच्चे :- इन सरकारी विद्यालयों में शत प्रतिशत मजदूर एवं किसानों के बच्चे पढ़ते हैं। उनकी शिक्षा के लिए ना तो जनप्रतिनिधियों को चिंता है और ना ही सरकार को। क्योंकि सरकारी मशीनरी में नीचे से लेकर ऊपर तक जितने अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं सबों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। उन्हें सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की कोई चिंता नहीं है। हालांकि अभिलेखों एवं बैठकों की कार्यवाहियों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की उनकी चिंता जरूर शामिल है।शीघ्र ही करेंगे व्यवस्था : डीएसई :- इस संबंध में दैनिक भास्कर से बात करते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि शिक्षकों के अभाव के कारण ऐसी विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। फिर भी वह कोई न कोई व्यवस्था करेंगे। Post navigation SIR प्रक्रिया की प्रगति का प्रमंडलीय आयुक्त ने लिया जायजा, डिजिटाइजेशन ड्राइव एवं मतदाता पुनरीक्षण कार्यों का किया औचक निरीक्षण। झारखंड आंदोलन में रूपी सोरेन का रहा है बहुत बड़ा योगदान : मिथिलेश ठाकुर