सभी की संपत्ति जब्त करने की तैयारी



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : झारखंड के पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में संगठित अपराध से जुड़े 89 चेहरे सामने आए हैं। ये लोग राज्य के बड़े आपराधिक गिरोहों के लिए काम करते हैं। कभी नक्सल हिंसा और नक्सल कमांडरों के लिए देशभर में चर्चित रहे पलामू प्रमंडल में अब संगठित अपराध के गुर्गों की चर्चा बढ़ रही है।

नक्सल से संगठित अपराध की ओर शिफ्ट

2017-18 तक पलामू प्रमंडल में 53 से अधिक इनामी नक्सल कमांडर सक्रिय थे। नक्सल कमजोर पड़ने के बाद यह इलाका संगठित अपराध के लिए चर्चित हो गया है। पलामू, गढ़वा और लातेहार पुलिस ने संगठित अपराध से जुड़े लोगों की विस्तृत सूची तैयार की है। इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। झारखंड में सक्रिय लगभग सभी आपराधिक गिरोहों का तार पलामू प्रमंडल से जुड़ा हुआ है। सूची में प्रिंस खान, राहुल सिंह, राहुल दुबे, डब्लू सिंह, सूजीत सिन्हा, अमन साहू समेत कई गिरोह से जुड़े नाम शामिल हैं। ये लोग फिलहाल जेल से बाहर या जमानत पर हैं।

पलामू-गढ़वा-लातेहार में संगठित अपराध के 89 चेहरे चिन्हित

गिरोहवार आंकड़े और जमानत की स्थिति

सूची के अनुसार डब्लू सिंह गिरोह से 35, सुजीत सिन्हा से 18, प्रिंस खान से 15, राहुल सिंह से 15, राहुल दुबे से तीन और अमन साहू गिरोह से तीन नाम जुड़े हैं। डब्लू सिंह गिरोह के सभी 35 लोग जमानत पर हैं। पुलिस ने संगठित अपराध से जुड़े जेल में बंद लोगों की अलग सूची भी बनाई है। प्रिंस खान गिरोह के आठ, राहुल सिंह गिरोह के 16 और राहुल दुबे गिरोह का एक सदस्य जेल में है, जबकि दो जमानत पर हैं।


पलामू जोन में अपराधियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

संपत्ति जब्ती और सीसीए की तैयारी

संगठित अपराध के खिलाफ पलामू प्रमंडल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की योजना बनाई है। सूची के सभी 89 चेहरों की संपत्ति का आकलन कर जब्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले यूएपीए में संपत्ति जब्ती का प्रावधान था, लेकिन नए बीएनएस की धारा 107 के तहत संगठित अपराध से जुड़े लोगों की संपत्ति जब्त की जा सकती है। इसके लिए स्पेशल टीम गठित की गई है। पहले चरण में संपत्ति आकलन चल रहा है। सूजीत सिन्हा गिरोह के तीन, डब्लू सिंह गिरोह के दस और राहुल सिंह गिरोह के दो सदस्यों के खिलाफ सीसीए की तैयारी है। सभी के सोशल मीडिया अकाउंट की मॉनिटरिंग के लिए भी स्पेशल टीम बनाई गई है।

“पलामू गढ़वा एवं लातेहार में संगठित अपराध से जुड़े चेहरों का विस्तृत ब्यौरा और सूची तैयार की गई है। तीनों जिलों से आंकड़े इकट्ठा किए गए हैं। पलामू, गढ़वा और लातेहार एसपी को सूची के आधार पर गिरोह के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। सभी पर लगातार मॉनिटरिंग का आदेश है, ताकि कोई अपराधिक घटना न हो सके। जेल में बंद लोगों की गतिविधियों का आकलन कर सीसीए कार्रवाई के लिए कहा गया है। बाहर रहने वाले संभावित अपराधियों के खिलाफ सीसीए और निगरानी प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाने का निर्देश है। बीएनएस के प्रावधानों के तहत संगठित अपराध से जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्ति को न्यायालय के आदेशानुसार जब्त किया जा सकता है। सभी एसपी को संपत्ति आकलन के निर्देश दिए गए हैं.” — किशोर कौशल, डीआईजी, पलामू

संगठित अपराध पर कार्रवाई की तैयारी

2006-07 से पनपा संगठित अपराध

पलामू इलाके में 2006-07 के बाद संगठित अपराध पनपा। उस दौरान कई हत्याएं और अपहरण हुए। बाद में रंगदारी की मांग भी बढ़ी। 2011-12 तक अलग-अलग गिरोह सक्रिय हो गए। कुणाल सिंह, सूजीत सिन्हा, डब्लू सिंह और विकास दुबे के नाम चर्चा में आए। 2020 में डॉन कुणाल सिंह की हत्या हो गई। जबकि कई नाम मुख्यधारा में शामिल हो गए। बाद में सूजीत सिन्हा के माध्यम से अमन साहू और प्रिंस खान गैंग की एंट्री हुई। 2025 में पलामू में अमन साहू का एनकाउंटर हुआ, जबकि 2026 में जामताड़ा में सूजीत सिन्हा का एनकाउंटर हुआ। अमन साहू के एनकाउंटर के बाद राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह की एंट्री हुई। शुरुआत में टेंडर मैनेजमेंट को लेकर मॉडल विकसित हुआ, जो बाद में रंगदारी और कारोबार से जुड़ गया। लातेहार में कोयला कारोबार में रंगदारी शुरू हुई। गिरोह के सदस्यों ने रेलवे और नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट में भी रंगदारी मांगी और घटनाएं अंजाम दीं।

पलामू, गढ़वा और लातेहार में गिरोहवार आंकड़े

नक्सलियों की संपत्ति जब्ती का मॉडल अब अपराधियों पर

पलामू-गढ़वा-लातेहार का इलाका 2018-19 तक नक्सल हिंसा के लिए देशभर में चर्चित था। उस समय पूरे झारखंड में सबसे अधिक इनामी नक्सली इसी इलाके के थे। पलामू और लातेहार में टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठनों का जन्म हुआ था। फिलहाल यहां आधा दर्जन के करीब इनामी नक्सली सक्रिय हैं। पूरे झारखंड में सबसे पहले इनामी नक्सलियों की संपत्ति का आकलन पलामू से शुरू हुआ था। पलामू रेंज में ही सबसे पहले इनामी नक्सली की संपत्ति जब्त की गई थी। पुलिस ने नक्सलियों के आर्थिक साम्राज्य को नष्ट करने वाले मॉडल पर ही अब संगठित अपराध के खिलाफ योजना बनाई है। उनकी संपत्ति का आकलन जारी है, ताकि उसे जब्त किया जा सके।