वृद्धजनों के साथ किया भोजन एवं सेवा कार्य



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा

गढ़वा : झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सह केंद्रीय सदस्य धीरज दुबे ने इस वर्ष अपना जन्मदिन सामाजिक सरोकार और मानव सेवा को समर्पित करते हुए अनोखे अंदाज में मनाया। जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने सपरिवार बाबा बंशीधर मंदिर एवं राजा पहाड़ी में पूजा-अर्चना कर राज्य एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद वंशीधर स्थित वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां रह रहे बुजुर्गों के बीच समय बिताया, उन्हें अपने हाथों से भोजन परोसा तथा उनके साथ बैठकर सपरिवार भोजन ग्रहण किया।

इस अवसर पर बाबा बंशीधर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र चौबे ने धीरज दुबे के माता-पिता को बाबा बंशीधर की प्रतिमा सप्रेम भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, धीरेंद्र चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित सेवा कार्यक्रम के तहत धीरज दुबे ने वृद्धाश्रम के बुजुर्गों का कुशलक्षेम जाना और उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ नागरिक हमारे अनुभव और संस्कारों की अमूल्य धरोहर हैं। उनका सम्मान और सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।

वृद्धाश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धीरज दुबे ने सभी वृद्धजनों के लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। साथ ही दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं, वस्त्र, मच्छरदानियां तथा वस्त्र सिलवाने के लिए नगद राशि भी प्रदान की। इस सेवा कार्य से वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने धीरज दुबे एवं उनके परिवार को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं सफल जीवन की कामना की।

इस अवसर पर धीरज दुबे ने कहा कि जन्मदिन केवल केक काटने या औपचारिक शुभकामनाएं स्वीकार करने का अवसर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का भी दिन होना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोई भी उत्सव तभी सार्थक होता है जब किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाई जा सके। जनसेवा ही जनार्दन सेवा है और समाजसेवा किसी एक क्षेत्र, वर्ग या स्थान की मोहताज नहीं होती। जहां भी अवसर मिले, मानव सेवा के लिए आगे आना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती संवेदनहीनता के बीच जरूरत है कि लोग अपने निजी उत्सवों को सेवा और सहयोग से जोड़ें, ताकि जरूरतमंदों को भी खुशियों में सहभागी बनाया जा सके। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे अपने जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य विशेष अवसरों पर गरीबों, असहायों और वृद्धजनों की सहायता कर समाज में सकारात्मक संदेश देने का प्रयास करें।