पलामू में छह लोगों की मौत का बना कारण1966 में पहुंचा था भारतसरसों तेल में आर्गेमोन मेक्सिकाना की मिलावट से पलामू के सिक्का गांव में छह लोगों की हुई मौतसदास्मृत आशुतोष रंजनप्रियरंजन सिन्हाबिंदास न्यूज, गढ़वागढ़वा : झारखंड के पलामू जिलांतर्गत पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में संभावित एपिडेमिक ड्रॉप्सी बीमारी से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। 2011 के बाद भारत में एपिडेमिक ड्रॉप्सी का यह पहला मामला सामने आया है। इस बीमारी का कारण मिलावटी सरसों का तेल बना है। सरसों तेल में ऑर्गेमोन मैक्सिकाना की मिलावट वाले तेल के सेवन से एपिडेमिक ड्रॉप्सी नामक बीमारी होती है। ऑर्गेमोन मैक्सिकाना को बहुत ही खतरनाक माना जाता है।क्या है ऑर्गेमोन मैक्सिकाना?दरअसल, ऑर्गेमोन मैक्सिकाना एक खर-पतवार है, जिसे स्थानीय भाषा में कटइला, सत्यानाशी या पीला धतूरा कहा जाता है। इसके पौधे कंटीले होते हैं और इसके बीज सरसों के समान दिखते हैं। सिक्का गांव की घटना के बाद यह पौधा एक बार फिर चर्चा में है। झारखंड के पलामू प्रमंडल में यह पौधा बड़े पैमाने पर पाया जाता है। यह पौधा बेहद कम पानी में पनपता है। इसके तेल का इस्तेमाल जानवरों के खुर में लगे कीड़ों को हटाने के लिए किया जाता है।1966 के विश्व विख्यात अकाल में भारत आया था ऑर्गेमॉन मैक्सिकाना1966 में बिहार भीषण अकाल की चपेट में था। इस दौरान बड़े पैमाने पर विदेशी अनाज सहायता के रूप में बिहार पहुंचा था। इसी अनाज के साथ ऑर्गेमोन मैक्सिकाना भी इस इलाके में पहुंच गई थी। पौधों और बोनसाई के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. डी.एस. श्रीवास्तव ने बताया कि ऑर्गेमोन मैक्सिकाना का पौधा अमेरिकी मूल का है, जो 1966 के अकाल के दौरान इस इलाके में पहुंचा था। अकाल के दौरान कई ऐसे पौधे पहुंचे थे जो बाद में परेशानी का कारण बन गए। ऑर्गेमोन मैक्सिकाना भी इन्हीं में से एक है।प्रोफेसर डी.एस. श्रीवास्तव बताते हैं कि इसके नाम से ही जाहिर है कि यह कम बारिश वाले क्षेत्र का पौधा है। यह बेहद खतरनाक है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके बीज सरसों के साथ आसानी से मिल जाते हैं, जिसके कारण लोगों को पता नहीं चल पाता। इसकी पहचान है कि इसके पत्ते कंटीले होते हैं और इसके तनों से पीला दूध निकलता है।यही ऑर्गेमोन मैक्सिकाना जब सरसों तेल से मिल जाता है तो यह विषाक्त हो जाता है। इसके बाद इसके सेवन से एपिडेमिक ड्रॉप्सी नाम की बीमारी हो जाती है, जो काफी जानलेवा है। एपिडेमिक ड्रॉप्सी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। केवल इसके लक्षणों का इलाज संभव है। ऑर्गेमोन मैक्सिकाना से तेल निकालने के लिए इसे उच्च तापमान पर गर्म करना पड़ता है। सरसों में मिलने के बाद इसका तेल आसानी से बाहर निकल जाता है।पलामू के सिविल सर्जन डॉक्टर अनिल कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि एपिडेमिक ड्रॉप्सी का इलाज नहीं है, सिर्फ इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। सरसों तेल में ऑर्गेमोन मैक्सिकाना की मिलावट से ही यह बीमारी होती है। सिक्का गांव की घटना में भी इसी बीमारी की पुष्टि हुई है, जो 2011 के बाद भारत में पहला मामला है।आर्गेमोन मेक्सिकाना से पलामू में हुई छह मौतेंपलामू के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार के लगातार पांच मौतों के बाद एपिडेमिक ड्रॉप्सी की बीमारी पकड़ी गई थी। बाद में परिवार के छठे सदस्य की भी मौत हो गई। सिक्का गांव के रहने वाले कुलदीप मेहता की सबसे पहले 19 जून को मौत हुई। 20 जून को उनकी बेटी बबिता कुमारी, 26 जून को बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी, 29 जून को बेटा नकुल मेहता की मौत हो गई। उसी दिन पलामू स्वास्थ्य विभाग के दल ने मृतकों के घर से खाने के सैंपल लिए थे।30 जून को फूड सेफ्टी की रिपोर्ट में सरसों तेल में ऑर्गेमोन मैक्सिकाना मिलने की पुष्टि हुई थी। बीमारी पकड़ने के बाद 7-8 जुलाई को कुलदीप मेहता की पत्नी लाखो देवी की भी मौत हो गई। कुलदीप मेहता का बेटा सुनील मेहता अभी भी RIMS में भर्ती है। Post navigation सतबहिनी झरना तीर्थ के हनुमान भाई निरंजन सिंह पंचतत्व में विलीन खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने शहर के विभिन्न डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, रिटेलर खाद्य प्रतिष्ठानों का किया औचक निरीक्षण