वहीं इसी उवि डुमरसोता में एक शिक्षक पढ़ाते हैं 150 बच्चों को

फिर भी मैट्रिक का रिजल्ट रहा 99 परसेंट

हाल ब्लॉक से जीरो माइल पर स्थित गांव की उच्च शिक्षा का


सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा

गढ़वा : शिक्षा में अनेक प्रकार के किए जा रहे प्रयोग एवं बच्चों को गुणवत शिक्षा प्रदान करने के भारी भरकम सरकारी नारे को मुंह चिढ़ाता हुआ एक विद्यालय प्रखंड मुख्यालय के बिल्कुल पड़ोस में स्थित है। प्रखंड कार्यालय से इस गांव की दूरी जीरो माइल है। बावजूद इसके यहां 150 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ाते हैं। क्योंकि 605 विद्यार्थियों को अभी मात्र चार शिक्षक पढ़ाने के लिए उपलब्ध हैं। जबकि एक शिक्षक प्रधानाध्यापक के प्रभार में हैं। इससे भी बड़ी बात इसी विद्यालय के नाम दर्ज है कि प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक मध्य विद्यालय से लेकर उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों को पिछले 10 वर्षों से पढ़ा रहे हैं। बावजूद इसके नाम एक सुखद बात दर्ज है कि वर्ष 2026 की वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में इस विद्यालय का 99% रिजल्ट हुआ है।

10 सालों से प्राइमरी टीचर पढ़ाते हैं हाईस्कूल के बच्चों को :- प्रखंड कार्यालय कांडी के पड़ोस में स्थित अपग्रेड हाई स्कूल डुमरसोता में पिछले 10 वर्षों से पहली कक्षा से मैट्रिक कक्षा तक की पढ़ाई हो रही है। लेकिन उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। जबकि इस दुर्व्यवस्था की हालत में यहां पर पदस्थापित एक साइंस टीचर पिछले 5-6 वर्षों से डेपुटेशन करा कर बाहर का मजा ले रहे हैं। उनकी डेपुटेशन की अवधि जब पूरी होती है तो उसमें फिर से एक्सटेंशन करा लेते हैं। विभाग को इस प्रतिकूल परिस्थिति की बदस्तूर जानकारी है। बावजूद इसके न जाने किस लोभ में इकलौते साइंस टीचर आनंद कुमार यादव के डेपुटेशन को बार-बार एक्सटेंशन दिया जा रहा है। इतना ही नहीं एक सहायक अध्यापिका वंदना मिश्रा भी दो-तीन वर्षों से अपना डेपुटेशन करा कर जिला मुख्यालय में रह रही हैं। जबकि इस विषय में बात करने पर विभाग जवाब देता है कि उच्च अधिकारियों के आदेश पर सभी प्रतिनियोजित शिक्षकों का प्रतिनियोजन रद्द कर दिया गया है तो फिर अपग्रेड मध्य विद्यालय डुमरसोता के दो शिक्षक वर्षों से कहां हैं। इसका जवाब कौन देगा।

वर्तमान में 1 से 10 तक 605 बच्चे हैं नामांकित :- इस विद्यालय के प्राथमिक कक्षाओं – वर्ग 1 से 5 तक के लिए मात्र पांच शिक्षक उपलब्ध हैं। इनमें ही एक शिक्षक प्रधानाध्यापक के प्रभार में हैं। जिनको कार्यालीय कार्य से क्लास लेने का समय नहीं मिल पाता है। इस प्रकार चार शिक्षकों के भरोसे 605 छात्र छात्राओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। छात्रों की संख्या की बात करें तो वर्तमान में वर्ग 1 से 5 तक 111 छात्राएं एवं 113 छात्र, वर्ग 6 से 8 तक 118 छात्राएं एवं 118 छात्र तथा वर्ग 9 – 10 में 75 छात्राएं एवं 70 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक गोविंद राम ने बताया कि हाल में कुछ और छात्राओं का एडमिशन हुआ है। जिनकी संख्या इसमें शामिल नहीं है।

कार्यरत शिक्षकों को उनके निर्धारित कार्य के अलावा उच्च कक्षाओं में भी पढ़ाना पड़ता है। इस कारण वे ड्यूटी से सांस भी नहीं ले पाते। पसीना पसीना होकर उन्हें वर्ग 1 से 10 तक की दौड़ लगानी पड़ती है। सरजमीन पर देखने के बाद डेढ़ सौ बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक उपलब्ध हैं। जबकि नई शिक्षा नीति का केंद्र सरकार ढिंढोरा पीटते नहीं थकती। उस नई शिक्षा नीति 2020 में 30 बच्चों पर एक शिक्षक एवं 30 बच्चों के लिए एक वर्ग कक्ष का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान का आखिर सरकार पालन कर रही है या शिक्षा विभाग पालन कर रहा है। इसका पता नहीं चलता। जबकि गाहे बगाहे सरकार से लेकर जनप्रतिनिधियों तक यह आवाज बार-बार उठाई जाती है कि सभी नेताओं, मंत्रियों एवं अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे। और सरकारी स्कूल का यह हाल है।

तत्काल पर्याप्त शिक्षकों की करें पोस्टिंग, शिक्षा है कि मजाक :- हरिहरपुर मंडल भाजपा के सांसद प्रतिनिधि विनोद बिहारी द्विवेदी ने कहा कि इस राज्य में शिक्षा व्यवस्था भी मजाक बनकर रह गई है। ऐसा उदाहरण किसी अन्य राज्य में नहीं मिलेगा जहां हाई स्कूल के बच्चों को प्राइमरी टीचर पढ़ाते हों। उन्होंने डुमरसोता उवि में तत्काल पर्याप्त संख्या में विषय वार शिक्षकों के पदस्थापन की मांग की है।

क्या कहते हैं डीईओ :- इस विषय में दैनिक भास्कर से बात करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी जगन्नाथ लोहरा ने कहा कि इस मामले की जांच करा कर अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।
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