आंदोलनकारियों के वंशजों को किया गया सम्मानितशहीद नीलांबर-पितांबर, जेठन सिंह खरवार और फेतल सिंह खरवार के संघर्ष को किया यादबिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलिसदास्मृत आशुतोष रंजनप्रियरंजन सिन्हाबिंदास न्यूज, गढ़वागढ़वा : झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला कमेटी गढ़वा की ओर से रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पूर्व मंत्री एवं झामुमो केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर के कल्याणपुर स्थित आवास पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के आदिवासी समाज के संघर्ष, इतिहास, संस्कृति, परंपरा और राज्य निर्माण आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों एवं झारखंड आंदोलनकारियों के वंशजों को सम्मानित कर उनके पूर्वजों के संघर्ष और योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।कार्यक्रम की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानियों एवं झारखंड आंदोलनकारियों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मौजूद स्वतंत्रता सेनानियों, आंदोलनकारियों के वंशजों, झामुमो नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास और झारखंड के निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से पलामू की धरती पर जन्मे वीर शहीद नीलांबर-पितांबर, जेठन सिंह खरवार और फेतल सिंह खरवार सहित अन्य वीर योद्धाओं के संघर्ष को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके अस्तित्व की लड़ाई में आदिवासी समाज की भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष से लेकर अलग झारखंड राज्य के आंदोलन तक आदिवासी समाज ने लगातार निर्णायक भूमिका निभाई है।आंदोलनकारियों के वंशजों को किया सम्मानितविश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झामुमो नेताओं की ओर से स्वतंत्रता सेनानी फेतल सिंह के वंशज बेलास सिंह, भुनेश्वर सिंह एवं अरुण सिंह तथा स्वतंत्रता सेनानी जेठन सिंह के वंशज नितेश सिंह खरवार को शॉल, माला, धोती एवं गमछा देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा विभिन्न झारखंड आंदोलनकारियों के वंशजों को भी सम्मानित किया गया।सम्मान समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जिन लोगों ने अपनी जमीन, जंगल, जल और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, उनकी अगली पीढ़ी को सम्मानित करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके इतिहास और संघर्ष को समाज के सामने जीवित रखने का प्रयास है। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि आने वाली पीढ़ियों को झारखंड के निर्माण में योगदान देने वाले वीरों और आंदोलनकारियों के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि उनके संघर्ष और बलिदान को हमेशा याद रखा जा सके।आदिवासी समाज के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता : धीरज दुबेझारखंड मुक्ति मोर्चा के मीडिया पैनलिस्ट सह केंद्रीय सदस्य धीरज दुबे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के द्वारा गढ़वा में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों एवं आंदोलनकारियों के वंशजों को सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक एवं जनहित के कार्यक्रमों में योगदान देने वाले लोगों को भी सम्मानित करने का कार्य किया जाता है।उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संघर्ष, संस्कृति और योगदान को याद करने का दिन है। झारखंड और पलामू की धरती ने ऐसे अनेक वीर योद्धाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष किया। इन वीरों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।धीरज दुबे ने कहा कि झारखंड के इतिहास में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। देश की आजादी के आंदोलन से लेकर अलग झारखंड राज्य के निर्माण तक आदिवासी समाज ने संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि शहीद नीलांबर-पितांबर, जेठन सिंह खरवार, फेतल सिंह खरवार जैसे वीरों ने जिस साहस और त्याग का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।उन्होंने कहा कि यह महज संयोग नहीं है कि ब्रह्मांड के प्रथम व्यक्ति कहे जाने वाले आदि मानव से लेकर भारत के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति तक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता गुरुजी शिबू सोरेन से लेकर राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक आदिवासी समाज से आते हैं। उन्होंने कहा कि आदिकाल से इस सृष्टि पर निवास करने वाले समुदायों को ही आदिवासी कहा जाता है।उन्होंने कहा कि मानव जीवन की शुरुआत में सभी लोग प्रकृति के साथ रहकर जीवन जीते थे। समय के साथ समाज का विकास हुआ और लोगों की क्षमता एवं कार्य के आधार पर सामाजिक व्यवस्थाएं विकसित हुईं। बाद में वर्ण और जाति व्यवस्था में जन्म आधारित भेदभाव की प्रवृत्ति आई, जिसका प्रभाव समाज पर लंबे समय तक रहा।धीरज दुबे ने कहा कि वर्तमान समय में भी आदिवासी समाज और झारखंड के हितों को लेकर संघर्ष जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान झामुमो को कमजोर करने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राजनीतिक रूप से रोकने के उद्देश्य से उन्हें जेल भेजा गया, लेकिन झारखंड की जनता ने एकजुटता का परिचय देते हुए ऐसे प्रयासों को विफल कर दिया।उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने फिर से एक आदिवासी बेटे को राज्य की बागडोर सौंपकर यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड की जनता अपने अधिकारों, पहचान और नेतृत्व को लेकर सजग है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता ने अपने जनादेश के माध्यम से यह संदेश दिया है कि राज्य के विकास और अधिकारों की लड़ाई को किसी भी राजनीतिक षड्यंत्र से रोका नहीं जा सकता।शिबू सोरेन के आह्वान पर गढ़वा से पैदल रांची पहुंचे थे हजारों लोग : लखन उरांवझारखंड आंदोलनकारी लखन उरांव ने झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौर को याद करते हुए कहा कि झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के आह्वान पर गढ़वा से हजारों आदिवासी पैदल चलकर रांची पहुंचते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह और संघर्ष की भावना थी।उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोग अपने अधिकार और अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन में शामिल होते थे। गढ़वा सहित पलामू प्रमंडल के विभिन्न क्षेत्रों से लोग आंदोलन में भाग लेने के लिए रांची तक जाते थे। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण लंबे संघर्ष और हजारों लोगों के त्याग का परिणाम है।आंदोलन के दौरान वाहनों की आवाजाही तक रोक दी जाती थी : मनोज ठाकुरझारखंड आंदोलन को याद करते हुए मनोज ठाकुर ने कहा कि अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान गुरुजी शिबू सोरेन के निर्देश पर गढ़वा में व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही तक रोक दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना था, ताकि झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिल सके।उन्होंने कहा कि उस समय आंदोलन करना आसान नहीं था। आंदोलनकारियों को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अलग राज्य की मांग को लेकर लोगों के अंदर जो जुनून था, उसके सामने कठिनाइयां भी छोटी पड़ जाती थीं। उन्होंने कहा कि आज झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में है, तो इसके पीछे हजारों आंदोलनकारियों का संघर्ष और बलिदान है। आदिवासियों के हित में काम कर सकते हैं हेमंत सोरेन : राजकिशोर यादवकार्यक्रम को संबोधित करते हुए झामुमो के केंद्रीय सदस्य राजकिशोर यादव ने कहा कि आदिवासी समाज के हितों की वास्तविक चिंता और उनके अधिकारों की रक्षा का काम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को रोकने के लिए चौतरफा षड्यंत्र कर रही है।उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता राजनीतिक परिस्थितियों को समझ रही है और जनता ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि झारखंडी जनता अपने अधिकारों और अपने नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ी है।वक्ताओं ने आदिवासी इतिहास और संस्कृति को आगे बढ़ाने पर दिया जोरकार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, भाषा, सामाजिक व्यवस्था और अधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करना भी है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हुई है।वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा को आगे बढ़ाया है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा की लड़ाई में भी आदिवासी समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। झारखंड के इतिहास को समझने के लिए आदिवासी समाज के संघर्ष और योगदान को समझना जरूरी है।बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमनकार्यक्रम के अंत में झामुमो नेताओं, आंदोलनकारियों के वंशजों, जनप्रतिनिधियों एवं उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से बिरसा मुंडा पार्क पहुंचकर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।इस दौरान उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने तथा आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया।कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव शरीफ अंसारी ने किया ।बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग रहे मौजूदकार्यक्रम में झामुमो महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष रेखा चौबे, कोषाध्यक्ष चंदन जायसवाल, ओम प्रकाश गुप्ता, दिलीप गुप्ता, नवीन तिवारी, आयुष गुप्ता, इस्तेखार अंसारी, रितेश तिवारी, राजा सिंह, मिन्हाज आलम, शत्रुघ्न उरांव, अमरेश्वर लाल उरांव, सुशीला मिंज, रामचंद्र बैगा, विजय सिंह प्रधान, अमर दयाल सिंह, रघुनाथ, पंकज उरांव, राधेश्याम सिंह, नंदलाल सिंह, मिथिलेश सिंह, पूरन सिंह खरवार, चंद्रदेव सिंह, कार्तिक पांडेय, शत्रुघ्न सिंह, रामबली सिंह, राजेंद्र उरांव, सिकंदर उरांव, अनुकरण सिंह, राजेश कुमार बैठा, हरिओम यादव, दिलीप नाथ सिंह, सनी चंद्रवंशी, सुमित पाल, अमर दयाल सिंह, विमल भुइंया, आराधना सिंह, वंदना जायसवाल, रेखा पाठक, आशीष गुप्ता, आशीष अग्रवाल, लल्लू मेहता सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग मौजूद थे।कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर आदिवासी समाज के गौरव, झारखंड आंदोलन के इतिहास और वीर शहीदों के जयकारों से गूंजता रहा। उपस्थित लोगों ने कहा कि झारखंड के निर्माण और यहां की पहचान को मजबूत करने में जिन वीरों ने अपना जीवन समर्पित किया, उनके संघर्ष को याद रखना और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। Post navigation प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रतीक्षा सूची से दो प्रखंड समन्वयकों की नियुक्ति स्थानीय नगर भवन गढ़वा में विश्व आदिवासी दिवस 2026 का भव्य समारोह का आयोजन