पतली मेंड़ पर कांटों के घोरान के बीच स्कूल आते जाते हैं बच्चे



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : खेत की पतली मेंड़ और दोनों तरफ से कांटों का घोरान। इसके बीच से संभल संभल कर स्कूल बैग संभाले स्कूल जाते बच्चे। इसी मेंड़ से होकर गुजरते स्कूल के शिक्षक भी। मौसम चाहे बरसात की ही क्यों ना हो। मेंड़ पर फिसलने के कारण बस्ता लिए बच्चे कांटों पर गिरकर लहूलुहान हो जाएं या क्यारियों की कीचड़ में सन जाएं। उनकी मजबूरी है इसी मेंड़ से होकर स्कूल जाना और स्कूल से आना। आखिर ऐसा कैसे है जबकि राजकीय प्राथमिक विद्यालय सबुआ के लिए राज्यपाल के नाम से 67 वर्षों पहले जमीन की रजिस्ट्री की जा चुकी है। फिर ऐसी हालत क्यों हुई कि बच्चों को स्कूल जाने आने के लिए एक अदद पगडंडी नुमा रास्ता भी नहीं है। ऐसा इसलिए है कि कुछ कब्जाधारियों ने जबरन स्कूल की जमीन पर कब्जा जमा रखा है।

सरकारी जमीन भी अवैध कब्जा में :- इतना ही नहीं गैर मजरूआ आम जमीन जिसे अब अनाबाद झारखंड सरकार कहा जाता है वैसी जमीन को भी कब्जाधारी अपने कब्जे में कर खेती बाड़ी करते हैं। जिसका नतीजा है कि अपनी जमीन और स्कूल के ठीक सामने सरकारी जमीन होते हुए भी बच्चों को आने-जाने के लिए एक अदद रास्ता भी नसीब नहीं है। यह मामला गिरने और गिर कर उठने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि अपने भूखंडों का मालिक होकर भी विद्यालय परिवार को इस मेड़ से आने-जाने पर गाली गलौज का सामना करना पड़ता है। आखिर इतनी बड़ी त्रासदी कई दशकों से जब यह स्कूल परिवार झेल रहा है तो सरकारी महकमा क्या कर रहा है।

सरकारी आदेश व मापी भी हो चुका है बेअसर :- इस स्कूल के प्रधानाध्यापक नवीन कुमार दुबे तो कहते हैं कि इन कब्जाधारियों को प्रशासन से भी कोई डर नहीं है। चाहे वह अंचल पदाधिकारी हों या थाना प्रभारी हों। किसी के आदेश का उनके सामने कोई मतलब नहीं है। जिसका नतीजा है कि इतनी असुविधा झेलकर सरकारी सेवा करने वाले व्यक्ति को भी यह नौकरी करनी पड़ रही है। मालूम हो कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय सबुआ के लिए ग्रामवासी ने अपनी 26 डिसमिल रैयती जमीन 1959 में तत्कालीन बिहार के राज्यपाल के नाम से रजिस्ट्री की थी। लेकिन आज की हालत यह है कि मात्र 11 डिसमिल जमीन स्कूल के कब्जे में है। जिस पर भवन बना हुआ है। भवन के अलावा इस स्कूल के बच्चों के पास खड़े होकर प्रार्थना करने की भी जमीन नहीं है। क्योंकि स्कूल की 15 डिसमिल जमीन पर दशकों से कब्जा करके उस पर खेती-बाड़ी की जा रही है। मीडिया में बार-बार इस मामले को सुर्खियां बनने और प्रधानाध्यापक के द्वारा अंचल पदाधिकारी कांडी, अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा एवं उपायुक्त गढ़वा को आवेदन देकर वस्तु स्थिति की जानकारी देते हुए स्कूल की जमीन को खाली करने का अनुरोध किया गया है।

एसडीओ ने जांच व सीओ दो बार करा चुके सीमांकन :- मामला को अति महत्वपूर्ण समझकर तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय सबुआ पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली एवं भूमि संबंधी विद्यालय के तमाम कागजातों की जांच की। इसके बाद उन्होंने अंचल पदाधिकारी कांडी को स्कूल की जमीन का सीमांकन करके सीओ एवं पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि को पंचायत में उपलब्ध निधि से बाउंड्री निर्माण का निर्देश दिया। एसडीओ के निर्देश के अनुसार 12 जनवरी 2024 को अंचल पदाधिकारी कांडी के आदेश से अंचल अमीन एवं राजस्व उप निरीक्षक की उपस्थिति में स्कूल के जमीन का सीमांकन किया गया। लेकिन बाउंड्री का निर्माण आज तक नहीं हो सका। सीमांकन का हस्र यह हुआ कि कब्जा धारियों में से एक ने अपना कब्जा छोड़ दिया। लेकिन दूसरे व्यक्ति ने सीमांकन के बाद अमीन के द्वारा गाड़े गए पत्थरों को उखाड़ कर फेंक दिया एवं अपना कब्जा आज तक बरकरार रखा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी 18 मार्च 2023 को अंचल पदाधिकारी कांडी के आदेश से अंचल अमीन एवं कर्मचारियों के द्वारा स्कूल के भूखंड की मापी की गई थी। लेकिन स्थिति बदस्तूर बनी रही। वर्तमान में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के द्वारा स्कूल में विकास मद की राशि प्रदान की गई है। जिससे जर्जर हो चुके भवन की रिपेयरिंग एवं स्कूल के सामने सरकारी जमीन पर एक चबूतरा का निर्माण कराया जा रहा था। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद हरिचरण साह, पुनीता देवी, कंचन कुमारी, कबूतरी देवी, सरयू साह एवं काशीनाथ साह ने चबूतरा निर्माण कार्य को जबरन रोक दिया। मालूम हो कि यह भूखंड खाता नंबर 147 और प्लॉट नंबर 547 में 33 डिसमिल का अनाबाद झारखंड सरकार की है। बावजूद इसके सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर जबरन कब्जा जमा रखा गया है। इसी के कारण बच्चों को मेड़ से होकर आना जाना पड़ता है। इस गंभीर मामले को लेकर प्रधानाध्यापक नवीन कुमार दुबे ने 20 जुलाई 2026 को उपायुक्त गढ़वा को आवेदन देकर बच्चों को आने जाने का रास्ता व चबूतरा निर्माण आदि का मार्ग प्रशस्त कराए जाने का आग्रह किया है। वर्तमान में इस विद्यालय में 66 छात्र छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए नवीन कुमार दुबे प्रधानाध्यापक के रूप में सरकारी शिक्षक और सुनील कुमार नाम से एक सहायक अध्यापक उपलब्ध हैं। नवीन कुमार दुबे को बच्चों की शिक्षा से लगाव है। वह इस विद्यालय को निजी विद्यालय का स्वरूप देना चाहते हैं। लेकिन अवैध कब्जाधारियों के कारण उन्हें बार-बार परेशान किया जाता है। उनकी सहनशीलता ही है कि वह यहां बने हुए हैं वरना बार-बार गाली गलौज सुनकर दूसरा कोई सरकारी शिक्षक स्थानांतरण कराकर दूसरे जगह चला गया होता।

जांच के बाद की जाएगी अग्रेतर कार्रवाई : बीईईओ
इस संबंध में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी विजय कुमार पांडेय ने कहा कि इस मामले की जांच के बाद अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।